Welcome

orkut Layouts

Monday, October 24, 2011

786 के अंको का अनूठा संग्रह

786 के अंको का अनूठा संग्रह

786 नम्बरों वाले नोटों का संग्रह
                 दुनिया रचने वाले व दुनिया में गुजर बसर करने वालों का शोख भी ला जवाब है। जिस तरह सृष्टि के रचयिता ने 84 लाख भांति भांति के जीव जन्तु,पशु पक्षी,मानव,नदी पहाड़ जंगल आदि की रचना की है। उसी प्रकार दुनिया वालों की शोख भी भिन्न- भिन्न बनाये है। कोई खाने पाने में मस्त है कोई धन कमाने में-जोड़ने में व अपनी मोटर कार,बंगले में मस्त, कोई चोरी जुआ,इश्क़ मुहब्बत में मस्त है। ऐसा ही एक उदाहरण है बगड़ कस्बे में जो झुन्झुनूं जिले से 10 कि.मी पूर्व में पड़ता है  बगड़ कस्बे के मण्ड्रेला रोड़,जाटाबास में रहने वाले रमेश फुलवारिया का है जो एक सरकारी पद पर शिक्षक है।
                 रमे फुलवारिया का शोख कब आदत में बदल गया उन्हें खुद पता नहीं। जब वह छोटा था तब अपनी दादीजी के पास रहकर बगड़ में पढ़ाई करता था उसका बाकी परिवार मुंबई रहता था एक बार उसके पापा मुंबई जा रहे थे। तब उन्होंने उसे एक 10 रुपये का नोट दिया और कहा इस पर खुदा के अंक लिखे  है इसे सम्हाल कर रखना यह मुसीबत में तुम्हारे काम आयेगा इस नोट के अन्तिम अंक 786 थे बड़े ही भोलेपन से रमेश कहते है। हमें तो उस समय कहीं खुदा के अक्सर नजर नहीं आये। जैसा हमारे पापा जी ने कहा हमने मान लिया। हमारे मन में एक बार सवाल भी  उठा की सिर्फ नम्बर ही क्यों लिखते है पुरा नाम क्यों नहीं? मान्यता के मुताबिक जब ‘‘बिस्मिल्लाह अल रहमान अल रहीम’’ लिखते है तो उसका जोड़ 786 होता है। इसलिए ऐसी जगहों पर जैसे घर दप्तर के दरवाजे आदि पर जहां खुदा का नाम लिखना बेअदबी माना जाता है, वहां यहीं अंक 786 लिखा जाता है। बस इसके बाद तो मेरा शोख बढ़ता हुआ कब आदत में बदल गया यह खुद को भी नहीं पता है।
सो रूपये के व अन्य नोटों  जिनके नम्बर 786 है उनका संग्रह
               रमेश फुलवारिया ने बताया कि एक दिन मैं स्कूल गया था पिछे  से मेरी दादीजी ने मेरे इकट्ठे किये गये 786 अंक वाले नोटों से अनजाने में राशन का सामान ले आई और जब मैं दोड़कर राशन की दुकान पर पहुंचा तब तक वो नोट दूसरे ग्राहक को दिये जा चुके थे। तब मुझे बहुत गहरा दुख हुआ और अहसास हुआ कि नोटों को सहेजने के साथ-2 सुरक्षित रखना भी बड़ी जिम्मेदारी है उसके बाद भी फुलवारिया ने हार नहीं मानी तथा इरादे और भी ज्यादा बुलन्द हो गये जो भी नोट हाथ में आता अंको पर नजर पहले जाती और नोटों को सहेजना शुरू कर दिया शुरूआत में तो घर वाले आस पास के लोग और दोस्त इसे इनका पागलपन समझ कर उन पर हंसते थे लेकिन बाद मे वे भी इस तरह के नोट इक्ट्ठा करके उन्हें देने लगे। इस तरह धीरे धीरे उनके पास इन नोटों का संग्रह होने लगा। आज उनके खजाने में 786 अंक के एक,दो,पांच,दस,,बीस,पचास,सौ,पांच सौ,हजार रूपये नोट शामिल है।
बस टिकट व नोटों के संग्रह के साथ रमेश
              फुलवारिया को अब तो नोटों का ही नहीं 786 के अंको वाले रेल टिकट,बस टिकट,रसीद, बिल आदि का भी संग्रह करने लगा है।
               फुलवारिया को किसी विशेष चीजों का संग्रह करने की आदत बचपन से ही थी। वह बचपन में रंग बिरंगे पंख,कांच की गोली, एक ही टाईटल के गाने,बटन,शायरी, विचित्र प्रकार के पत्थर के टुकडों का संग्रह रखता था। 1998 में  अलग जगहों के पहाडों से इकट्ठे किये गये पत्थरों का संग्रह आज भी बी.एल.  सीनियर सैकण्डरी स्कूल की कृषि विज्ञान की प्रयोग शाला में प्रोजेक्ट के रूप में रखे है। जो अन्य विद्यार्थियों को भी ऐसी दुर्लभ वस्तुओं को संग्रहीत करने के प्रेरित करते है।
               मैं  आप से भी अनुरोध करते हैं अगर आपको भी अगर कोई ऐसी दुर्लभ वस्तु या पुराने सिक्के या कोई विचित्र वस्तु मिले या प्राप्त हो तो उसे सहेजे या हमें हमारे पते पर भिजवा दे। संगह करना एक अच्छी आदत है।
 रमेश फुलवारिया का परिचय -
 नाम --  रमेश कुमार (अध्यापक)
योग्यता -

                  B.Sc.,  M.Sc.,  MCA,  M.A.,  PGDCA.  APGDCSA, PGDIT, CPM,  B.Ed.
   
पदाधिकारी -
1.    कोषाध्यक्ष - मन्दिर स्वामी खेतादास समिति लोहार्गल,जिला झुन्झूनूं
2.    सचिव - मां सरस्वती चिल्ड्रन एकेडमी शिक्षण संस्थान बगड़,

                    जिला झुन्झुनूं
3.    संरक्षक  -  रैगर समाज समिति बगड़,जिला झुन्झुनूं
4.    पूर्व विज्ञान सचिव सेठ मोतीलाल (पी.जी) कॉलेज झुन्झुनूं
         पता - मण्ड्रेला रोड़,जाटाबास,पोस्ट-बगड़
          जिला झुन्झुनूं (राज.)
          मो. 08955263800, 09669074407

             E mail - ramesh_fulwariya@yahoo.com
                       rameshfulwariya@gmail.com

झिरी गांव की कहानी


झिरी गांव की कहानी (दास्तां) रमेश फुलवारिया की जुबानी

एक विडम्बना
आजादी के 64 वर्ष बाद भी इस झिरी गॉव में यातायात  के साधनों, बिजली, पानी, दुरसंचार सेवा, विधालयो मे स्टाफ, चिकित्सालयों मे आधुनिक तकनिकी आदि का अभाव हैं

   झिरी गॉव धौलपुर (राजस्थान) के सरमथुरा शहर से 28 कि.मी. दुर डांग (जंगल) मे बसा एक गॉव हैं। यहा कि प्राकृतिक छटा देखने से मन प्रफुलित हो जाता हैं। यह प्राकृतिक कि गोद मे बसा एक गॉव हैं। ऐसा कहा जाता हैं। कि प्राचीन समय मे इस गॉव में पहाड़ियों की दरार ( झिरियों ) से पानी निकलता था। इसी लिए इस गॉव का नाम झिरी पड़ा। झिरी गॉव  वर्तमान स्थान पर बसने से पहले, यह गॉव श्री बाबु महाराज का मन्दिर, जो चम्बल नदी के किनारे पर बना हुआ हैं वहा पर बसा था। झिरी गॉव एक ग्राम पंचायत मुख्यालय हैं। इस ग्राम पंचायत के अन्तर्गत झिरी, भम्पुरा, शंकरपुर, रुध का पुरा, हल्लू का पुरा, भगतपुरा, पनावती, खिल्लाडाना, सेवरियापुरा, दुर्गसी, अमरपुरा, जारोला आदि गॉव आते हैं।
  झिरी ग्राम पंचायत मुख्यालय पर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, राजीव गॉधी केन्द्र, पशु चिकित्सालय, डाक कार्यालय, पटवार घर, प्राथमिक व माध्यमिक विधालय व ग्राम पंचायत मुख्यालय के अन्तर्गत 12-13 विधालय, पुलिस चैकी आदि सरकारी विभाग कार्यरत हैं। इनके साथ ही श्री गिर्राज प्रसाद मीणा द्वारा संचालित निजी शिक्षण संस्थान अनामिका पब्लिक शिक्षण संस्थान, भम्पुरा और  श्री राकेश तिवारी द्वारा संचालित श्री नृसिह जी प्राथमिक विधालय, झिरी  भी हैं। श्री नृसिह जी प्राथमिक विधालय, झिरी के व्यवस्थापक श्री संजू सिंह ठेकेदार है।  
अपनी सुविधा के लिए ग्रामीणों द्वारा पत्थर काट कर बनाये गये रास्ते

कहा जाता हैं कि इस गॉव मे सर्वप्रथम ब्राह्यण, मीणा, जाटव परिवार आकर बसे था। आज झिरी गॉव मे ब्राह्यणों के अलावा महाजन, राजपुत,  कोली, तेली मुस्लिम, नाई, बढई, मेहतर आदि बसे हैं। तथा इस ग्राम पंचायत के अन्तर्गत आने वाले गॉवो मे उपरोक्त जाति के अलावा केवट, प्रजापत, कुशवाह, गुर्जर, कहार आदि बसे हैं।
 झिरी गॉव एक कृषि प्रधान गॉव हैं। यहॉ के अधिकतर लोग कृषि कार्य व पशुपालन पर निर्भर रहते हैं। गॉव के कुछ लोग सरकारी सेवा मे व गॉव से बहार प्राइवेट नोकरी भी करते हैं। गॉव में ही एक पी.डब्लयु.डी. के ठेकेदार श्री संजू सिंह जादौन हैं। ठेकेदार श्री संजू सिंह जादौन गॉव के विकास के लिए हरदम प्रयास करते रहते हैं। उनका गॉव के विकास मे महत्त्वपुर्ण योगदान हैं। किसी नेता व सरकारी अधिकारी को गॉव मे आने के लिए प्रेरित करना व उनसे गॉव कि समस्या का निराकरण करवाने मे वे बहुत महत्त्वपुर्ण भुमिका निभते हैं।
  बसेड़ी पंचायत समिति का उप प्रधान श्रीमति कविता मीणा भी झिरी गॉव मे श्री रतिराम जी मीणा की पुत्र वधु हैं। यह गॉव के शौभाग्य कि बात हैं कि देश आजादी के बाद इस गॉव की महिला उप प्रधान बनी।
   झिरी गॉव के सरपंच श्री रामजी लाल मीणा, बहुत ही ईमानदार, मिलनसार, मधुभाषी व्यक्ति हैं। वे हर वक्त ग्राम के विकास व ग्राम की समस्या निर्वारण के बारे प्रयासरत रहते हैं।

 किसी भी गॉव का विकास यातायात के साधनो के अभाव मे अधुरा रहता हैं। इस गॉव मे आजादी के 64 वर्ष बाद भी सरकार की तरफ से यहा यातायात  के साधनों का अभाव हैं। लेकिन मै धन्यवाद देना चाहता हो उन शक्स को जो इन दुर्लभ परिस्थितियों मे भी गॉव वालो को ये सुविधा उपलब्ध करा रहे है। इसी गॉव के निवासी श्री रामस्वरुप जी पटेल व गोधन जी मीणा द्वारा लगातार गॉववासियों को यातायात की सुविधा बहुत ही कम दाम मे उपलब्ध कराई जा रही हैं।

 
                
                श्री केशव जी तिवारी, जो गॉव के पोस्ट मास्टर के पद पर कार्यरत हैं। उनके व उनके सहयोगियो द्वारा गॉव मे डाक विभाग की सेवा बहुत ही अच्छे तरीके से चली आ रही हैं। कहते हैं जब गॉव मे यातायात का साधन था तब भी विषम परिस्थितियो मे, वे इसी तरह अविरल सेवा प्रदान करते रहे हैं। 
                
  
  
पहाड़ी पर भ्रमण के दौरान फोटो बनवाते रमेश फुलवारिया
गांव के लोक देवता कुंवर बाबा  का मन्दिर जिसके आशिर्वाद से गावं के लोगों की जहरिले जानवरों से रक्षा होती हैं

विद्यालय में शिक्षा ग्रहण करते बालक तथा
 शंकर पुर गावं का एकमात्र जल स्रोत जहा से ग्रामीण कावड़
नुमा बर्तन में जल भरकर ले जाते हैं









 चुनाव के समय राजनेताओं ने बड़े बड़े वादे किये लेकिन किया कुछ नहीं बिजली के नाम पर इस गांच में सिर्फ सुने पोल ही खडे हैं और तरस रहें हैं कि कब इन राजनेजाओं या सरकार की आंख खुले और इन्हें बिजली के तार व बिजली नसीब हो



   श्री जगदीश प्रसाद जी तिवारी व श्री केशव जी शर्मा जो गॉव के चिकित्सालय मे कार्यरत हैं। जो गॉव मे सकंट मोचन की भुमिका निभते हैं। इनके द्वारा गॉव वालो को 24 घण्टे चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराई जाती हैं। ग्राम पंचायत झिरी के अन्तर्गत आने वाले गॉवो के व्यक्तियों की हर वक्त सेवा करने मे तत्पर रहते हैं।
   श्री राजाराम जी जादौन, झिरी ग्राम पंचायत के राशन डीलर का कार्य काफी समय से बेखुबी निभा रहे हैं। इतनी कठिन परिस्थितियो, दुर्लभ रास्तों से राशन सामग्री ला कर यहा वितरण कर रहे हैं।
    इनके अलावा यहॉ के पटवारी, ग्राम सचिव, नरेगा सहायक सचिव, अध्यापकगण आदि गॉव के विकास के लिए, गॉव वालो के साथ रहते हैं।
गावं का पानी का जोहड़
   गॉव मे होने वाली संगीतमय रामलीला व प्रतिवर्ष भरने वाला गुदड़ी का मेला देखने लायक हैं। इन्हें देखने के लिए दुर-2 से लोग आते हैं। गुदड़ी का मेला मे होने वाली कुश्ती प्रतियोगिता मे भाग लेने के लिए पडोसी राज्य मध्यप्रदेश, उतरप्रदेश से भी पहलवान आते हैं। गॉव के लोगो द्वारा प्रतियोगिता जीतने वालो को उचित ईनाम दिया जाता हैं। प्रतियोगिता शांतिपूर्वक तरीके से सम्पन्न कराई जाती हैं।
   मै सरकार का ध्यान इस गॉव की समस्या कि और दिलाना चाहता हु कि आजादी के 64 वर्ष बाद भी इस गॉव में यातायात  के साधनों, बिजली, पानी, दुरसंचार सेवा, विधालयो मे स्टाफ, चिकित्सालयों मे आधुनिक तकनिकी आदि का अभाव हैं। गॉव के लोगों द्वारा बिजली की फाईल जमा करवाने के बाद उन्हें बिजली का कनेक्शन नही मिल रहा। गॉव मे सैकंडरी स्कुल होने के बावजूद यहॉ एक भी विषय अध्यापक व प्रधानाध्यापक नही हैं। सिर्फ एक बाबु, दो चपरासी व तीन विधार्थी मित्रों के सहारे यह स्कुल चल रहा हैं।
   गॉव मे आने वाले अधिकारीगण व राजनेतागण झिरी गॉव को पर्यटक स्थल के रुप मे देखते हैं। हर व्यक्ति, अधिकारी व राजनेता को झिरी का नाम सुनते ही यहा घुमने की इच्छा करती हैं। तथा वे यहॉ घुमकर चले जाते हैं। लेकिन यहॉ के भोल-भाले लोगो की कोई नही सुनता। मै यहा ज्यादा कुछ नही कहुगॉ। यदि उपरोक्त जानकारी मे कोई गलती हो तो क्षमा चाहता हु।  धन्यवाद।





लेखक - रमेश कुमार (अध्यापक)
राजकीय उच्च प्राथमिक विधालय,
शंकरपुर (पं.स.-बसेड़ी), जिला-धौलपुर 
मोबाईल न.-  08955263800

Sunday, September 4, 2011

श्री बाबू महाराज मन्दिर, झिरी



श्री बाबू महाराज मन्दिर, झिरी

 श्री बाबू महाराज मन्दिर, धौलपुर जिले के सरमथुरा शहर के 30 कि.मी. दुर झिरी गॉव मे चम्बल नदी के किनारे बना हैं। यह प्राचीन मन्दिर हजारो वर्षो पुराना है। इस मन्दिर का पुनः जीर्णोधार पूर्व सरपंच श्री अशोक सिंह जादौन (झिरी वाले) ने करवाया था। वर्तमान मे चम्बल नदी के किनारे श्री बाबू महाराज के तीन मन्दिर हैं। जिनमें झिरी, थूम्म का मन्दिर तो राजस्थान में व करजोनी का मन्दिर मध्यप्रदेश मे स्थित हैं। जिनमे झिरी मे स्थित श्री बाबू महाराज का मन्दिर सबसे प्राचीन हैं। क्योकि श्री बाबू महाराज ने सर्वप्रथम यही चम्बल नदी के किनारे मीणा जाति के एक भक्त व्यक्ति को दर्शन दिये।


                      बहुत प्राचीन समय कि बात हैं कि एक दिन चम्बल नदी के अन्दर एक व्यक्ति नहा रहा था। तभी उसे एक कमल का फुल तैरता हुआ उसकी तरफ आया तो व्यक्ति ने उस कमल के फुल को देखा तो पाया कि उसमे एक पत्थर की लुडिया (पिण्डी) थी। तभी अचानक उस कमल के फुल की लुडिया (पिण्डी) से श्री बाबू महाराज प्रकट हुए। व उस व्यक्ति को अपना आर्शीवाद देते हुए, अपना मन्दिर निर्माण की बात कही। तभी से ये प्राचीन मन्दिर बना हुआ हैं।
                     वैसे तो हर माह की शुक्ल पक्ष की दोज को यहा लोग जात देते है। लेकिन भाद्रपद शुक्ल पक्ष की दोज को यहॉ  इस मन्दिर पर श्री बाबू महाराज का बड़ा मेला भरता हैं। जिसमे दूर-2 के स्थानो से जात्री जात देने आते हैं। व श्रृद्धा पूर्वक मन्नत मांगते हैं जिसे श्री बाबू महाराज पुरी भी करते हैं।
                     श्री बाबू महाराज के मन्दिर के पास ही श्री महादेव जी, श्री गणेश जी, श्री भैरोबाबा, श्री झिरीया देवी माताजी का मन्दिर भी स्थित हैं। कहा जाता हैं कि झिरीया माता के नाम से ही झिरी गॉव का नाम रखा गया हैं।
                     मन्दिर के पुजारी श्री सियाराम जी भक्त ने बताया कि स्थानीय लोगों व मवेशियो कि जहरीले जानवरों व बीमारियों से रक्षा श्री बाबू महाराज ही करते हैं। यदि किसी व्यक्ति या जानवर को जहरीला जानवर कांट लेता हैं तो श्री बाबू महाराज के भक्त द्वारा, झाडा (झाडू) लगा देने से वह ठीक हो जाता हैं।
                     श्री बाबू महाराज कि मान्यता रखने वाले व्यक्ति शुद्ध शाकाहारी होते हैं। दारु नही पीते हैं व अपने घर मे प्रकाश करने व खाना बनाने के लिए केरोसिन तेल का उपयोग नही करते हैं। श्री बाबू महाराज के मन्दिर मे प्रत्येक जाति के लोग आते हैं। यहा के लोग अपने मवेशियो के गले मे मजीरे की बजाय घण्टी बाधते हैं। जिससे पशुओ को किसी प्रकार का रोग नही लगता हैं।
                    एक बार की बात हैं कि श्री बाबू महाराज के एक भक्त ने  श्री बाबू महाराज के मन्दिर मे कहा कि यदि आप दे सकते हो तो महाराज आपकी भक्त करजोनी की 80 वर्षीय निःसंतान व दुःखी सिया गुर्जरी को एक संतान दे दो। उसी समय श्री बाबू महाराज करजोनी के मटमेले घाट पर स्नान करने आई उस 80 वर्षीय निःसंतान व दुःखी सिया गुर्जरी को आर्शीवाद दिया की “जा भक्त तुमहारे 9 माह बाद एक पुत्र की प्राप्ति होगी” । सिया गुर्जरी ने घर जाकर अपने पति बाबा गगन को यह बात बताई तो, बाबा गगन ने अपनी पत्नी को समझाया कि बावली किसी ने तुमसे मजाक तो नही की हैं। कभी 80 वर्ष की उम्र मे भी संतान हुई हैं ? लेकिन सिया गुर्जरी ने कहा कि मुझसे किसी ने मजाक नही की हैं। मुझे तो साक्षात्कार श्री बाबू महाराज ने दर्शन दिये हैं। व उन्होने ही मुझे आर्शीवाद स्वरुप ये बात कही हैं।
और हुआ भी वही। श्री बाबू महाराज का दिया हुआ आर्शावाद खाली कैसे जा सकता हैं।  सिया गुर्जरी के पुरे 9 माह बाद स्वस्थ, सुन्दर एक लड़का पैदा हुआ। जिसका नाम मान रखा गया। तभी से करजोनी मे श्री बाबू महाराज की मान्यता होने लगी व वहॉ भी श्री बाबू महाराज का मन्दिर बना। करजोनी मे श्री बाबू महाराज के मन्दिर से जुड़ी बहुत बड़ी कहानी हैं जो मेने एक कैसेट मे सुनी थी। लेकिन मै यहॉ उसका वर्णन करुगॉ तो एक बहुत बड़ा ग्रन्थ तैयार हो जायेगा।
       श्री बाबू महाराज ने ऐसे अनेको चमत्कार किये हैं जिनके कुछेक के बारे मे यहॉ मे बताना चाहुगा।
                    एक बार दिल्ली के एक मुस्लिम शासक ने किसी गुर्जर की गर्भवती गाय को दीवार मे चिनवा दी। व गुर्जर को दरबार मे हाजिर होने का फरमान जारी किया। जब गुर्जर को इस बात का पता चला तो उसने सोचा गाय तो गई ही , अब पता नही मुस्लिम राजा उनहे क्या सजा और देगा। उसने श्री बाबू महाराज को स्मरण करके मुस्लिम राजा के दरबार मे हाजिर हुआ। तब  मुस्लिम राजा ने गुर्जर को चुनौती दी कि “यदि तुमहारे भगवान मे शक्ति हैं तो बचा लो इस गाय को”। तभी अचानक एक तेज प्रकाश हुआ व शासक द्वारा चिनवाई दीवार फट गई। वहा उपस्थित लोग ये देखकर आश्चर्य चकित रह गये कि उस दीवार से बच्चे को दुध पिलाती वह गाय जिंदा पाई गई। तभी मुस्लिम शासक भी श्री बाबू महाराज के सामने नत मस्तक होकर मांफी मॉगने लगा। व श्री बाबू महाराज को पुजने लगा।
                    एक बार गॉव मे वर्षा नही हुई। जिससे गॉव मे बहुत भयंकर आकाल पड़ गया। मवेशी मरने लगे व गॉव के लोगो को खाने पीने का संकट खडा हो गया। तब गॉव के लोग चम्बल नदी के किनारे स्थित श्री बाबू महाराज के मन्दिर पर इकट्ठे होकर, श्री बाबू महाराज से बरसात के लिए प्रार्थना करने लगे। वहा स्थित प्रत्यक्षदर्शीयो ने बताया कि एकाएक चम्बल नदी से पानी का तेज चक्रवात उठा व झिरी व पड़ोसी गॉव मे तेज मुसलाधार वर्षा हुई। ऐसा कहते हैं कि उस बरसात मे पानी के साथ जलीय जीव मछली आदि भी बरसात के पानी के साथ बरसी। क्योकि वह सम्पूर्ण पानी चम्बल नदी से ही पानी का चक्रवात हो कर उठा था।
                   अभी 02-09-2011 को पुरे झिरी गॉव वासियो के सहयोग से श्री बाबू महाराज का बहुत बड़ा धर्म-पुण्य गॉव मे सम्पन्न हुआ हैं। जिसमे झिरी गॉव वासियो ने पुरी झिरी पंचायत को भोजन के लिए आमंत्रित किया था। इतना बड़ा धर्म पुण्य इस क्षेत्र मे मेने पहली बार देखा हैं। जिसमे एक-सवा लाख रुपये का तो देशी घी लगा था। जो गॉव वालो से इकट्ठे किये गये रुपयो से लाया गया था। जो झिरी गॉव वासियो की श्री बाबू महाराज  के प्रति निष्टा व भक्ति भाव को प्रकट करता हैं।
“जय श्री बाबू महाराज की”।
लेखक - रमेश कुमार फुलवारिया (अध्यापक)
          राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, शंकरपुर (झिरी)
           पं.स. - बसेड़ी, जिला- धौलपुर (राजस्थान)