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Saturday, October 27, 2012

श्री बीजासन माता मन्दिर

श्री बीजासन माता मन्दिर

 श्री बीजासन माता महाराज मन्दिर झिरी गॉव के पश्चिमी दिशा मे स्थित है। प्राचीन काल से लोग माता को एक शक्ति के रुप मे पूजा करते रहे है। यह मन्दिर 500 से 700 फीट गहरे कुण्ड के पास शांत सुरमय स्थान पर निर्मित प्राचीन मन्दिर है। इस मन्दिर का पुजारी श्री रामकिशन जी साक्य कोली है।
माता दानव के पद चिन्ह
माता दानव के पद चिन्ह
स्थानीय लोगो ने बताया की इस गहरे कुण्ड के पास एक बार माता बीजासनी दानव के बीच भयंकर युद्ध हुआ था। जिस युद्ध के दौरान बने माता दानव के पद चिन्ह आज भी कुण्ड के पास बने है। जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। 




मुझे यह जानकारी जुटाने मे मेरे साथी नीरज व्यास व राजवीर मीणा ने सहयोग किया। मैं डनका आभारी हु।

श्री गोपाल जी मन्दिर

श्री गोपाल जी मन्दिर

श्री गोपाल जी मन्दिर

श्री गोपाल जी भगवान का मन्दिर झिरी गांव के मुख्य बाजार मे स्थित हैं। इस मन्दिर मे राधा-कृष्ण की पीतल की मूतिै हैं। 
 
                      इस मन्दिर की पूजा अर्चना का कार्य पंडित श्री केशव जी शर्मा करते है। हर वर्ष जल-झुलनी ग्यारस को गोपाल जी भगवान का डोला (झांकी निकाली जाती हैं।गांव के सामाजिक फैसले यहां पर पंचायत के रुप मे भगवान को साक्षी कर किये जाते हैं। और लोग ईमान से सत्य बोलते है। इस मन्दिर पर कोई झूठ नही बोलता। झूठ बोलने वाले को ईश्वरीय दण्ड आवश्य मिलता हैं। ऐसा लोगो ने प्रत्यक्ष विश्वास हैं।

               

श्री नृसिंह जी मन्दिर

श्री नृसिंह जी मन्दिर

श्री नृसिंह जी मन्दिर
श्री नृसिंह जी भगवान का मन्दिर झिरी गांव के किले के अन्दर पश्चिमी-दक्षिणी दिशा मे स्थित एक प्राचीन मन्दिर हैं।
                    

 इस मन्दिर में स्थित प्रतिमा बहुत ही प्राचीन शैली से बनी हुई है। इस मन्दिर मे श्री नृसिंह जी भगवान की काले पत्थर की बनी मूर्ति है। साथ ही राधा रानी की भी मूर्ति है। हाल ही मे इस मन्दिर का जीर्णोधार ठेकेदार श्री संजू सिंह जादौन ने करवाया था। 

 
 इस मन्दिर की पूजा अर्चना का कार्य पण्डित श्री बृजेन्द्र कुमार शर्मा करते हैं। मन्दिर के आगे एक बहुत बड़ा चबुतरा है। जो भजन संध्या के काम आता है।  
 यहॉ प्रत्येक माह मे एक या दो बार सुन्दर काण्ड का बहुत ही सुन्दर ढंग से पाठ किया जाता है। मन्दिर परिसर के एक तरफ भगवान शिव परिवार की प्रतिमायें लगी हैं। यह मन्दिर बहुत ही सुन्दर शांत वातावरण मे स्थित हैं।

झिरी का किला



झिरी का किला


झिरी गॉव के किला बहुत ही प्राचीन किला हैं। इस किले पर महाराजा राव का शासन रहा था। स्थानीय लोगों के बताये अनुसार इस किले की नींव श्री राजा मुकट राव  ने सन् 1613 को माघ बड़ी दोज के शनिवार के दिन लगी थी। और  किले का नागर या प्रवेशोत्सव 1752 में किया गया था।  
उन्होनें बताया कि इस किले पर सन् 1793 में राजा श्री गोपाल सिंह ने शासन किया था। उसके बाद भी बहुत से राजा-महाराजाओं ने इस किले पर शासन किया।
 जिनका नाम समय की स्पष्ट जानकारी नही होनें की बात कही। उन्होने बताया कि झिरी किले पर श्री रणजीत सिंह इनके बाद श्री रघुवीर सिंह ने भी शासन किया। बताते हैं कि झिरी किले के शासक धौलपुर जाट महाराज के बीच 6 माह तक लगातार युद्ध चला था। जो अनिर्णित रहा था। वर्तमान मे महाराजा राव साहब के वंशज जयपुर व ग्वालियर रहते हैं।
राजीव गॉधी केन्द्र
 भारत स्वतंत्र होने के पश्चात् अब ये किला सरकार के अधिन होने के कारण इसमें सरकारी सार्वजनिक भवनों का निर्माण कार्य किया जाता हैं।
 इस किले के अन्दर पुलिस चौकी , प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र व राजीव गॉधी केन्द्र आदि बने हैं।
इनके अलावा इस किले मे प्राचीन काल के निर्मित अंजनी माता, भगवान शिव परिवार, श्री नृसिंह जी का कलात्मक मन्दिर बने हैं। जिनकी विस्तरित जानकारी आगे दी जा रही हैं।